• Helpline No :
  • |
  • Email: admissions@igu.ac.in
  • A+
  • A
  • A-
IGU

आईजीयू में IPR जागरूकता एवं नवाचार को बढ़ावा देने हेतु विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित।

Published on: 27 May 2026

इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग (सीएसई) द्वारा इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) के सहयोग से “बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights)” विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय परिसर में ऑफलाइन मोड में आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एनएसयूटी, नई दिल्ली के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नन्हे सिंह रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व, नवाचार एवं शोध कार्यों की सुरक्षा, पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क तथा स्टार्ट-अप एवं अनुसंधान में आईपीआर की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में नवाचारों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है तथा विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने शोध एवं तकनीकी विचारों को पेटेंट कराने के प्रति जागरूक होना चाहिए।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी ने विद्यार्थियों को नवाचार एवं अनुसंधान आधारित गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया तथा कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों में शोध संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने विद्यार्थियों को तकनीकी एवं शोध आधारित कार्यों में निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया। विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सतींदर बल गुप्ता ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे विशेषज्ञ व्याख्यान विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन एवं करियर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के दौरान आईपीआर जागरूकता, पेटेंट फाइलिंग प्रक्रिया, अकादमिक शोध को व्यावसायिक स्वरूप देने तथा नवाचार आधारित स्टार्टअप अवसरों पर विस्तृत चर्चा की गई। विद्यार्थियों ने प्रश्नोत्तर सत्र में सक्रिय भागीदारी करते हुए विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न पूछे।

कार्यक्रम के अंत में विभाग की ओर से मुख्य वक्ता प्रोफेसर नन्हे सिंह का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया गया। यह आयोजन विद्यार्थियों में नवाचार, अनुसंधान एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।